Tuesday, June 23, 2020

अंहकार

#धन #का #अहंकार..✍️
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लाहौर में दुलीचन्द नामक एक करोडपति सेठ रहते थे। उन्हें अपनी धन-सम्पदा का बड़ा अहंकार था।
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यह दर्शाने के लिये कि मैं बीस करोड़ की सम्पत्ति का मालिक हूँ, उन्होंने अपने निवास पर बीस पताकाएँ (20 झंडी) लगा रकखी थीं।
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एक बार जब उन्हें पता चला कि शहर के एक सराय में गुरु नानक ठहरे हुए हैं तो वे उनसे मिलने गये।
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वहाँ उन्होंने गुरु नानक के चरणों में शीश नवाकर स्वर्णमुद्राओं की एक पोटली उन्हें देते हुए कहा, आपकी और क्या सेवा करूँ ?
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नानकदेव जान गये कि इस व्यक्ति को अपने धन का बड़ा अहंकार है।
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उन्होंने उसे एक सूई देते हुए कहा कि इसे अगले जन्म में वापस कर देना।
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दुलीचन्द इसे गुरुका प्रसाद मानकर घर वापस लौट आये और सूई को उन्होंने पूजागृह में एक ओर रख दिया।
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अकस्मात् उनके ध्यान में आया कि गुरु नानक ने इसे अगले जन्ममें वापस करने को कहा है, मगर यह भला कैसे सम्भव है ?
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मरते वक्त क्या सूई साथ में जा सकती है ? वे गुरु से पुनः मिलने तुरंत सराय में गये और उनसे कहा...
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अभी थोड़ी देर पहले आपने इस सूई को पुनः अगले जन्म में वापस करनेको कहा था। मगर यह कैसे सम्भव है ?
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मरते वक्त तो मनुष्य खाली हाथ जाता है !
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गुरुदेव ने कहा, दुलीचन्द !  जब मरते वक्त तू एक सुई को भी नहीं ले जा सकता, तब इतनी सारी सम्पत्ति कैसे ले जा सकेगा ?
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ये शब्द सुनते ही दुलीचन्द के अन्तर्चक्षु (मन की आंखे) खुल गये। वे घर लौट आये।
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अपनी सारी सम्पत्ति गरीबों एवं जरूरत मन्दों में बाँट दी और गुरुदेव के शिष्य बन गये।

किसी ने कहा बहुत सुकून में रहते हो।
क्या किसी की शरण में रहते हो ?
हमने जवाब दिया कि
श्री राधेगोविंद की शरण में रहते हैं
और वो जिस हाल में रखते हैं
उस हाल का शुक्र अदा करते हैं।

कृपा हे श्री राधेगोविन्द... 🙏😊

EATING HABITS

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🙏
*अगर जल्दी में खाते हैं खाना, तो हो सकते हैं मोटापे का शिकार*

"1 धीरे-धीरे और अच्छी तरह से चबाकर खाने से भोजन में लार अच्छी तरह मिल जाती है, जिससे भोजन को पचाना आसान हो जाता है। इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी सही रहता है।
2 माना जाता है कि डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए भी भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए। इससे खाना तो ठीक से पचता ही है साथ ही ग्लकोज भी ठीक प्रकार से टूट कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
3 धीरे-धीरे और चबाकर खाने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं खत्म हो जाती हैं, जैसे कब्ज व गैस आदि। धीरे-धीरे खाने से मन भी शांत रहता है और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ाना या गुस्सा आना भी कम हो जाता है।
4 धीरे-धीरे, चबाकर खाने से भोजन करने में समय लगता है और आप ज्यादा खाने से बच जाते हैं, जिससे मोटापे जैसे परेशानी से भी बचाव होने में मदद मिलती है।"

Sunday, June 21, 2020

http://devbhoomidarshan.in/devbhoomi-uttarakhand-ke-femous-food/

Thursday, June 4, 2020

मिञता

आज सुबह विनय ने काफी जल्दी मेडिकल की दुुकान खोल ली थी और लगातार कई डॉक्टरों के दवाई लेने आने के कारण वह काफी थक भी गया था तभी उसके सामने उसकी हम उम्र चश्मा लगाए हुए एक व्यक्ति अपने पूरे परिवार सहित खड़ा हो गया एक बार को तो विनय भौचक्का रह गया और उछलकर अपने मित्र जीके को गले लगा लिया तदोपरांत वह जीके को अपने निवास पर लाया वहा अपनी पत्नी व बच्चों से जीके का परिचय करवाया। विनय की माता जी व पिताजी जीके से भलीभांति परिचित थे ।जीके ने तुरंत ही विनय की माता जी का पिता जी के चरण स्पर्श करें वह उनका आशीर्वाद लिया ।सभी लोग परस्पर एक दूसरे को अपना परिचय दे रहे थे और बातचीत कर रहे थे तभी जीके के छोटे पुत्र ने जीके से कहा पापा आपने हमें कभी विनय अंकल के बारे में नहीं बताया कि वह आपके इतने घनिष्ठ मित्र हैं। यह सुनकर जीके को कोई जवाब देते नहीं बन रहा था तभी विनय ने बीच में बात काटते हुए जीके के पुत्र से कहा कि आप हमारी मित्रता के बारे में जानना चाहते हो। सभी बच्चों ने विनय को चारों ओर से घेर लिया और अपने बारे में बताने का अनुरोध करने लगे विनय ने जीके की अनुमति से सुनाना शुरू किया यह उन दिनों की बात है जब विनय नवी कक्षा का छात्र था और पारकर कॉलेज के हॉस्टल में रहता था रोज की तरह सुबह तैयार होकर वह कॉलेज गया और कॉलेज के उपरांत जब वापस हॉस्टल में आया तो देखा की एक तगड़ा सा लड़का विनय की चारपाई पर बैठा हुआ है। दो व्यक्ति भी उस लड़के के साथ मौजूद थे ।उन्होंने विनय से पूछा कि आप बिलारी रहते हो तो विनय ने तुरंत हामी भर दी उन्होंने बताया कि यह लड़का उनका छोटा भाई है। जिसका नाम जी के हैं और यह अब तुम्हारे साथ हॉस्टल में रहेगा जीके भी तब नवी कक्षा में थे वह जीके का विनय से पहला परिचय था ।भाइयों के जाने के पश्चात जीके और विनय परस्पर काफी देर तक बातें करते रहे हॉस्टल में जीके और विनय को एक ही कमरा एलॉट हुआ तथा उनकी अलमारी भी एक थी कुछ समय में ही जीके और विनय बहुत ही घनिष्ट मित्र हो गए अब चाहे सुबह उठना हो नाश्ता करना हो पढ़ाई करनी हो या कॉलेज जाना है। दोनों संग संग ही जाते थे क्योंकि जीके का गांव बिलारी के नजदीक था लिहाजा बिलारी से मुरादाबाद व मुरादाबाद से बिलारी आना जाना है सभी संग संग ही होता था ।आपसी सौहार्द के बीच जीके और विनय ने नवी कक्षा अच्छे नंबरों से पास कर ली जीके के माता पिता व विनय के माता पिता दोनों की परीक्षा फल से काफी संतुष्ट थे ।नवी कक्षा के बाद अब दसवीं कक्षा में जीके और विनय पर बोर्ड परीक्षाओं का काफी दबाव था जी के के भाई ने 10वीं व 12वीं की परीक्षा में कॉलेज टॉप किया था लिहाजा जीके पर भी अच्छे नम्बर लाने के लिए काफी दबाव था। जीके समय-समय पर अपने भाई से बोर्ड परीक्षा में अच्छे नंबर लाने हेतु टिप्स ले लिया करते थे जीके और विनय दोनों ने जल्द ही अपना हाईस्कूल का पूरा सिलेबस कर लिया था और बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए थे उन दिनों प्री बोर्ड का चलन नहीं था लिहाजा छमाही परीक्षा ही प्री बोर्ड की तरह होती थी छमाई परीक्षाओं में पूरा कोर्स आता था विनय और जी के दोनों अपनी अपने क्लास टीचर से छमाही परीक्षा के टाइम मिलने गए और उनसे पूछा की इस अर्धवार्षिक परीक्षा का क्या महत्व है तब उनके क्लास टीचर ने कहा कि यह परीक्षा सिर्फ प्रैक्टिस के लिए है इसके नंबर कहीं नहीं जुड़ेंगे शायद इसका रिजल्ट भी ना आए अब जी के और विनय दोनों क्लास टीचर से बात कर कर हॉस्टल आ गए और यह सोचने लगे की अर्धवार्षिक परीक्षा दे या ना दे पहले तो दोनों में यह विचार करा की चलो परीक्षा देने में क्या हर्ज है और इस प्रकार पहला पेपर दे दिया परंतु पहला पेपर देने के बाद दोनों ने सोचा किस प्रकार तो काफी समय नष्ट हो जाएगा हम परीक्षा ना दे करके घर पर ही तैयारी करें तो ज्यादा बेहतर होगा । हॉस्टल के वॉर्डन स्कूल के टीचर आदि जितने भी शुभचिंतक थे उन लोगों ने विनय और जी को को बहुत समझाया कि यह परीक्षा तुम्हारे फायदे के लिए ही है लेकिन विनय और जी के मानने को तैयार नहीं थे । उनका तर्क था कि हम घर पर ज्यादा बेहतर तरीके से तैयारी कर सकते हैं इस प्रकार विनय और जीके ने अगला पेपर छोड़ दिया ।
अब विनय और जीके ने सोचा की घर जाकर तो तैयारी करनी है तो पहले आज चलो पिक्चर देख लेते हैं और दोनों पिक्चर देखने चले गए अगले दिन विनय और जीके बिलारी आ गए वहां से जीके अपने गांव चले गए घर पहुंचकर विनय ने अपनी माता जी को सारी बात बताई कि वह अर्धवार्षिक परीक्षा नहीं दे रहे हैं और घर पर रहकर ही बोर्ड एग्जाम की तैयारी करेंगे विनय की बात सुनकर विनय की माताजी चुप रही और कुछ ना बोली जब दोपहर को विनय के पिता जी घर आए तो उन्होंने विनय के द्वारा कही गई सारी बात विनय के पिताजी को बताई अब यह बात चल ही रही थी किसी ने दरवाजा खटखटाया और विनय ने फौरन दरवाजा खोल कर देखा की जी के वहां जीके व उसके दोनों बड़े भाई विनय के घर आए हुए थे । अब तो विनय के पिताजी व जीके के दोनों भाइयों ने मिलकर विनय और जी के दोनों की बहुत डांट लगाई और उन्हें तुरंत वापस जाकर अर्धवार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा अभी तो घर में विनय और जी के नए पिक्चर वाली बात नहीं बताई थी वरना क्या होता कहना मुश्किल था घरवालों के हुक्म के मुताबिक विनय और जी के दोनों वापस हॉस्टल आ गए और अगले दिन की अर्धवार्षिक परीक्षा की तैयारी करने लगे सुबह जब क्लास टीचर वार्डन आदि लोगों ने विनय और जीके को देखा तो वह मन ही मन मुस्कुराए और उन्हें समझते देर न लगी के कान कहां से उमठे गए हैं । कुछ दिन तक तो विनय और जीके को बड़ा असहज लगा लेकिन बाद में जीवन चर्या आराम से बीतने लगी जल्द ही अर्धवार्षिक परीक्षा का परिणाम भी आ गया विनय व जीके के सभी विषयों में नंबर अच्छे थे सिवाय उन दो पेपरों के जिनमें वह अनुपस्थित रहे थे । इसके पश्चात विनय बाजी के दोनों अपने-अपने घर आ गए वह बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने लगे धीरे-धीरे बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आ रही थी और आखिर वह दिन भी आ गया जब बोर्ड की परीक्षाएं विनय और जीके को देनी थी बोर्ड की सभी परीक्षाएं विनय और जीके की बहुत अच्छी हुई बोर्ड की परीक्षाओं के पश्चात विनय और जी के दोनों अपने-अपने घर आ गए और बोर्ड की परीक्षा का परिणाम का इंतजार करने लगे उस समय इंटरनेट नहीं हुआ करता था इसलिए अखबारों में ही परीक्षा का परिणाम आया करता था विनय प्रथम श्रेणी में बोर्ड की परीक्षाओं में पास हुआ जिसकी सूचना विनय के ताऊ जी स्वयं लेकर चंदौसी से आए विनय को जीके के परिणाम की भी चिंता थी ।उसने अपने व्यक्तिगत सूत्रों से पता लगवाया की जीके का परीक्षा परिणाम क्या रहा तो पता चला किसी के भी प्रथम श्रेणी में पास हुआ है 8 दिनों बाद जीके और विनय दोनों अपनी मार्कशीट लेने कॉलेज साथ-साथ आए मार्कशीट आ चुकी थी। विनय और जी के दोनों मार्कशीट लेने तुरंत अपने क्लास टीचर के पास पहुंचे तो पता चला कि विनय के 65% वह जीके के 75% नंबर आए थे यह यह देख कर विनय का फ्यूज उड़ गया और वह सोचने लगा की जीके ने और उसने दोनों ने तैयारी तो साथ साथ की है लेकिन नंबरों में इतना फर्क कैसे 8 या 10 नंबर ज्यादा होते तो बात अलग थी मगर विनय ने जीके से उस समय कोई बात नहीं की और दोनों चुपचाप वापस बिलारी आ गए घर पर सब बहुत खुश थे । विनय और जीके के माता पिता उनकी परफॉर्मेंस से अत्यंत प्रसन्न थे परंतु विनय के मन में यह सवाल बार-बार खाए जा रहा था की जीके के नंबर इतने अधिक कैसे आए इसी दौरान जीके के यहां एक प्रोग्राम का निमंत्रण विनय के घर आया और जीके ने विनय से जरूर आने का वादा लिए विनय जीके के घर प्रोग्राम से पूर्व भी पहुंच गया वाह उनके माता-पिता का आशीर्वाद लिया जीके का घर गांव में बड़ा आलीशान बना हुआ था । जीके अपने घर की छत पर विनय को ले गया वहां जी के और विनय दोनों चुपचाप बैठे रहे जीके विनय की प्रश्न सूचक दृष्टि भाप गया था और उसने विनय से पूछा कि तुम मेरे इतने अच्छे नंबरों से प्रसन्न नहीं हो विनय ने जीके से कहा ऐसी कोई बात नहीं जीके ने विनय से कहा मैं तुम्हारा मित्र हूं अगर कोई बात है तो मुझसे बेहिचक पूछो तब विनय ने जीके के ऊपर प्रश्नों की बौछार कर दी जिसक सार यह था की जब वह दोनों साथ-साथ पढ़े साथ साथ घूमने और साथ साथ ही तैयारी करें तो दोनों के नंबरों में इतना फर्क कैसे जीके यह सुन थोड़ी देर शांत रहे फिर उन्होंने बताया कि वह सिलेबस में प्रयुक्त गणित व साइंस की किताबों के अतिरिक्त अन्य किताबों से भी पढ़ाई किया करते थे । जिससे कि अच्छे नंबर आ सकें विनय को जीके की यह बात सुनकर बहुत गुस्सा आया और विनय ने जीके से कहा कि यह बात तुम्हें मुझे बतानी चाहिए थी कि तुम अन्य लेखकों की किताबें भी पढ़ते हो जीके ने तुरंत अपनी गलती स्वीकारी व भविष्य में कभी इस प्रकार की प्रतिस्पर्धा ना करने की कसम ली काफी देर आपसी बहस के बाद दोनों इस नतीजे पर पहुंचे की 11वीं कक्षा में एक जैसे विषय होने पर प्रतिस्पर्धा तो होगी और मित्रता बचानी मुश्किल हो जाएगी अतः 11वीं में विनय और जीके ने अलग अलग विषयों का चयन किया इस प्रकार दोनों अपने-अपने विषयों में अपनी-अपनी तैयारी करते थे ।इस प्रकार दोनों ने 12वीं में गुड सेकंड डिवीजन से पास की विनय तत्पश्चात चंदौसी व जीके आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गए विनय और जीके का संपर्क काफी टाइम तक बना रहा परंतु अब की बार 10 वर्षों के पश्चात मुलाकात हुई यह कहकर विनय शांत हुआ और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सभी बच्चों विनय और जीके की कहानी सुनकर खुश हुए पश्चात जीके ने विनय से विदा ली और जल्दी आने का वायदा किया।

विवेक आहूजा
तिलक अस्पताल
बिलारी जिला मुरादाबाद
@9410416986
@7906933255
Vivekahuja288@gmail.com

Saturday, January 4, 2020



Monday, December 30, 2019

तजुर्बा


स्नान विधि

*ठंढ बढ रही है*। अब *स्नान* के निम्न प्रकार को *इस्तेमाल* किया जा सकता है।
*1 :- कंकडी़ स्नान* -> इस स्नान में पानी की बुंदो को अपने ऊपर छिड़कते हुए ,मुँह धोया जा सकता है।
*2 :- नल नमस्कार स्नान* -> इसमें आप नल को नमस्ते कर ले, स्नान माना जायेगा।
*3 :- जल स्मरण स्नान* -> यह उच्च कोटि का स्नान है , इसको रजाई के अन्दर रहते हुए पानी से नहाने को याद कर लो, नहाया हुआ माना जायेगा।
*4 :- स्पर्शानूभूति स्नान* -> इस स्नान में नहाये हुए व्यक्ति को छूकर 'त्वं स्नानम् , मम् स्नानम् ' कहने से स्नान माना जायेगा।

*शीतकाल को देखते हुए तीन आधुनिक स्नान-*
*1 :- Online Bath*- कंप्यूटर पर गंगा के संगम की फोटो निकाल कर उस पर ३ बार माउस क्लिक करें और फेसबुक पर उसे Background Photo के रूप में लगाएं.
*2 :- Mirror Bath*- दर्पण में अपनी छवि को देखकर एक-एक कर तीन मग पानी शीशे पर फेंकें और हर बार "ओह्हहा" करें.
*3 :- Virtual Bath*- सूरज की ओर पीठ कर अपनी छाया पर लोटे से पानी की धार गिराएँ और जोर-जोर से "हर-हर गंगे" चिल्लाएं.

*यकीनन ताजगी महसूस होगी ।*
कसम से ज्ञान बहुत है पर कभी घमंड नहीँ किया| 🤭🤭😜😜

Sunday, December 29, 2019

#Indian railways

Suggestion:

माननीय  रेल मंत्री जी विनम्र  निवेदन
# ट्रेन चलने  से  पूर्व  जो reservation
Chart prepare होता  है  वो सार्वजनिक किया  जाए
ताकि  TT साहब मनमानी  न कर सके
# कृपया ट्रेन के  अन्दर   तो रेल नीर मिल ही जाए
#ट्रेन  के  अन्दर  हिजड़ों  द्वारा  वसूली  न की जाए
  रेल पुलिस  कहा रहती हैं  पता नहीं
# रेल के  अन्दर  रेलवे  से  ज्यादा प्राइवेंट
   लोग  सफाई  करते हैं  जो सफाई  के  बाद  पैसे  मांगते हैं 


महोदय  ध्यान दे

धन्यवाद


Vivekahuja288@gmail.com 

Thursday, December 19, 2019

Friendship invitation

My email  address  is 

vivekahuja288@gmail.com

Hobby: make  new friends around  the  world

Please  connect






Friday, October 4, 2019

SOUTH EX

                                                                                                                                                                                               SOUTH EXTENTION  शिक्षा  व फैशन का समागम
साउथ एक्स जो कि दिल्ली के दक्षिण हिस्से में मौजूद  है  जिसके आसपास किदवई नगर आईएनए  लाजपत नगर डिफेन्स कॉलोनी एम्स मालवीय नगर जैसे बहुत ही विकसित कॉलोनी मौजूद है आर्थिक दृष्टि से बहुत ही संपन्न साउथ एक्स पुरे भारत वर्ष में दिल्ली की पहचान  बनी  हुई है यहाँ की शैक्षिक दर 87 प्रतिशत के करीब है यह दो भागो में बना हुआ है साउथ एक्स 1 व साउथ एक्स 2 यहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर  की बहुत से शोरूम है  इसके अतिरिक्त साउथ एक्स अपनी शिक्षण संस्थानों के लिए भी जाना जाता है यहाँ विभिन्न कोर्स के लिए बहुत से संस्थान मौजूद है जिसमे पुरे भारतवर्ष से युवक युवतिया आकर इन कोर्सो को कर के अपना भविष्य  सवारते है   हम साउथ  एक्स को शिक्षा व  फैशन स्थल कह  सकते है  शिक्षा के क्षेत्र में साउथ एक्स दिल्ली  ही नहीं बल्कि पुरे उत्तर भारत में काफी चर्चित है MBA /MCA / डिजिटल मार्केटिंग /एनीमेशन  आदि  यहाँ बहुत  कोर्स है इनके अतिरिक्त मेडिकल  व इंजीनियरिंग में में प्रवेश हेतु यहाँ काफी उच्च स्तर के कोचिंग संस्थान है जिनमे कोचिंग ग्रहण कर के छात्र डॉक्टर व इंजीनियर  बनने में सफलता हासिल कर रहे है      
यहाँ पर आने वाले छात्र जो की पुरे भारतवर्ष से आकर यहाँ कोचिंग करते है या किसी कोर्स में एडमिशन लेते है के लिए यहाँ पेइंग गेस्ट का धंधा जोरो पर चल रहा है  साउथ एक्स में रहने वाले करीब  50 प्रतिशत लोग अपने घरो पर पीजी का इंतजाम किये हुए है   जिससे बहार से आने वाले छात्रों को रहने खाने की सुविधा मिल जाती है तथा यहाँ रहने वाले लोगो को एक आय का साधन हो जाता है
साउथ एक्स में वैसे तो बहुत से शिक्षण संसथान है और सभी संस्थानों की अपनी विशेषता है तथा यहाँ पड़ने वाले विद्यार्थी आगे चलकर अपना
भविष्य उज्जवल कर सकते है
अगर हम फैशन की बात करे तो साउथ एक्स में एक से बढ़कर एक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बहुत से शोरूम रेस्टोरेंट आदि मौजूद है जिनमे मैक्डोनाल्ड डोमिनोस लाकोस्टय हल्दीराम लेविस आदि बहुत से देशी व विदेशी ब्रांड की शाखाए यहाँ खुली हुई है  जो साउथ एक्स की शोभा बड़ा रही है इन सभी बड़ी ब्रांड के शोरूमो में पूरी साउथ दिल्ली के लोग आकर खरीदारी करते है इसके अतिरिक्त विदेशो से आने वाले
मेहमान भी यहाँ के फैशन के कायल है  साउथ एक्स में  रहने  वाले लोगो की दिनचर्या एक अग्रणी समाज में रहने वाले लोगो की भाति है तथा पहनावा दिल्ली के फैशन का घोतक है

Tetanus

टेटनस

पशुओं और मनुष्यों के मल में या मिटटी में पलने वाला एक जीवाणु
यह जीवाणु जब घाव के रास्ते शारीर में पहुँच जाता है तो टेटनस हो जाता है|
टेटनस होता कैसे है ?
-पशुओं के काटने से
- चाकू के घाव से
- बन्दूक कि गोली लगने से
- गन्दे सुई से कान खोदने या इन्जेक्सन लेने से
- कंटीली लोहे कि तार से खुरचने पर
- घाव पर गोबर लगाने से
- काँटी या कांच से बने घाव से भी हो सकता है |
जिन व्यक्तियों में टेटनस न होने देने वाले टीके नहीं लगवाएं हैं और समय – समय पर बूस्टर डोज नहीं लिया है उन्हें भी टेटनस हो सकता है|
छोटे बच्चों को होने वाले टेटनस के कारण
-ऐसी किसी धारदार चीज से नाल-नाभी काटने पर जिसे स्प्रिट से नहीं धोया गया या उबले पानी में नहीं धोया गया है|
- जब नाभी काटने के बाद उसपर गोबर रख दिया जाता है|
लक्षण
  • एक तरह क छुतहा घाव जो दिखता नहीं है
  • निगलने में कठिनाई
  • जबड़ा कड़ा हो जाता है
  • गर्दन और बदन के दूसरे अंग अकड़ जाते हैं
  • बच्चे लगातार रोते हैं, वे दूध भी निगल नहीं पाते|
उपचार
टेटनस एक खतरनाक बीमारी है, लक्षण देखते ही डाक्टर को दिखाएँ
  • व्यक्ति को अन्धेरे शांत जगह में लिटा दें|
  • घाव कि जगह को साबुन से धोएँ
  • घाव में अगर कुछ फंसा हो तो उसे साफ चीज से बाहर निकाल दें
बचाव
  • समय-समय पर टीका लगवाएं
  • कटने पर तुरत टेटनस का इंजेक्सन लें
  • बच्चे के नाभी कटने के लिए उबाले गए ब्लेड का ही इस्तेमाल करें|

Tuesday, October 1, 2019

रक्षाबंधन



राजा बलि और लक्ष्मी मां ने शुरू की भाई-बहन की राखी


राजा बली बहुत दानी राजा थे और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त भी थे। एक बार उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। इसी दौरान उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु वामनावतार लेकर आए और दान में राजा बलि से तीन पग भूमि देने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश नाप लिया। इस पर राजा बलि समझ गए कि भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं। तीसरे पग के लिए उन्होंने भगवान का पग अपने सिर पर रखवा लिया। फिर उन्होंने भगवान से याचना की कि अब तो मेरा सबकुछ चला ही गया है, प्रभु आप मेरी विनती स्वीकारें और मेरे साथ पाताल में चलकर रहें। भगवान ने भक्त की बात मान ली और बैकुंठ छोड़कर पाताल चले गए। उधर देवी लक्ष्मी परेशान हो गईं। फिर उन्होंने लीला रची और गरीब महिला बनकर राजा बलि के सामने पहुंचीं और राजा बलि को राखी बांधी। बलि ने कहा कि मेरे पास तो आपको देने के लिए कुछ भी नहीं हैं, इस पर देवी लक्ष्मी अपने रूप में आ गईं और बोलीं कि आपके पास तो साक्षात भगवान हैं, मुझे वही चाहिए मैं उन्हें ही लेने आई हूं। इस पर बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया। जाते समय भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि वह हर साल चार महीने पाताल में ही निवास करेंगे। यह चार महीना चर्तुमास के रूप में जाना जाता है जो देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठानी एकादशी तक होता है।

द्रौपदी और कृष्ण का रक्षाबंधन

राखी से जुड़ी एक सुंदर घटना का उल्लेख महाभारत में मिलता है। सुंदर इसलिए क्योंकि यह घटना दर्शाती है कि भाई-बहन के स्नेह के लिए उनका सगा होना जरूरी नहीं है। कथा है कि जब युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था। शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। लौटते हुए सुदर्शन चक्र से भगवान की छोटी उंगली थोड़ी कट गई और रक्त बहने लगा। यह देख द्रौपदी आगे आईं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। इसके बाद जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया तो श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी के चीर की लाज रखी। कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था।

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाए 




राजा बलि और लक्ष्मी मां ने शुरू की भाई-बहन की राखी
राजा बली बहुत दानी राजा थे और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त भी थे। एक बार उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। इसी दौरान उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु वामनावतार लेकर आए और दान में राजा बलि से तीन पग भूमि देने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश नाप लिया। इस पर राजा बलि समझ गए कि भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं। तीसरे पग के लिए उन्होंने भगवान का पग अपने सिर पर रखवा लिया। फिर उन्होंने भगवान से याचना की कि अब तो मेरा सबकुछ चला ही गया है, प्रभु आप मेरी विनती स्वीकारें और मेरे साथ पाताल में चलकर रहें। भगवान ने भक्त की बात मान ली और बैकुंठ छोड़कर पाताल चले गए। उधर देवी लक्ष्मी परेशान हो गईं। फिर उन्होंने लीला रची और गरीब महिला बनकर राजा बलि के सामने पहुंचीं और राजा बलि को राखी बांधी। बलि ने कहा कि मेरे पास तो आपको देने के लिए कुछ भी नहीं हैं, इस पर देवी लक्ष्मी अपने रूप में आ गईं और बोलीं कि आपके पास तो साक्षात भगवान हैं, मुझे वही चाहिए मैं उन्हें ही लेने आई हूं। इस पर बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया। जाते समय भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि वह हर साल चार महीने पाताल में ही निवास करेंगे। यह चार महीना चर्तुमास के रूप में जाना जाता है जो देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठानी एकादशी तक होता है।
द्रौपदी और कृष्ण का रक्षाबंधनराखी से जुड़ी एक सुंदर घटना का उल्लेख महाभारत में मिलता है। सुंदर इसलिए क्योंकि यह घटना दर्शाती है कि भाई-बहन के स्नेह के लिए उनका सगा होना जरूरी नहीं है। कथा है कि जब युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभा में शिशुपाल भी मौजूद था। शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान किया तो श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया। लौटते हुए सुदर्शन चक्र से भगवान की छोटी उंगली थोड़ी कट गई और रक्त बहने लगा। यह देख द्रौपदी आगे आईं और उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। इसी समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि वह एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे। इसके बाद जब कौरवों ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया तो श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी के चीर की लाज रखी। कहते हैं जिस दिन द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी का पल्लू बांधा था वह श्रावण पूर्णिमा की दिन था।

Monday, September 30, 2019

शंख

दोस्तों, हिन्दू मान्यताओं में शंख का बहुत महत्व है। शंख का वर्णन पुराने से पुराने ग्रन्थ में मिल जाता है। शंख धर्म और स्वास्थ्य दोनों में अपना महत्व रखता है। भारतीय धर्म शास्त्रों में शंख का स्थान विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण है। शंख का अर्थ है संकल्प, सुनिश्चय का प्रकटीकरण। पूजा अर्चना तथा अन्य मांगलिक कार्यों पर शंख ध्वनि की विशेष महत्ता है।

एक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक एक दैत्य का वध किया था, उसी शंखासुर के मस्तक तथा कनपटी की हड्डी का प्रतीक है शंख। धार्मिक मान्यता जो भी हो, परंतु वैज्ञानिक दृष्टि कोण से कहें तो शंख सागर का एक जलचर है जो कि ज्यादातर वामावर्त या दक्षिणावर्त आकार में बना होता है। शास्त्रों में विभिन्न स्थानों पर शंख को समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में एक माना जाता है। महत्व व उपयोग: शंख को निधि का प्रतीक माना जाता है। इसे घर में पूजा स्थल पर रखने से अनिष्टों का शमन व सौभाग्य में वृद्धि होती है

Sunday, September 29, 2019

धर्म

🌱🔅🌧🌧💦

*🏝📯अच्छे इन्सान की सबसे पहली*
     *और सबसे आखिरी निशानी*
                    *ये हैं कि*
     *वो उन लोगों की भी इज्जत करता है*
     *जिनसे उसे किसी तरह के*
     *फायदे की उम्मीद नही होती..✍🏼*⚖

 
       🌿जयश्रीकृष्णा🌧🥁

Wednesday, January 30, 2019

इज्जत

*लोग जब आपसे पूछते हैं कि आप क्या काम करते हो ?*

*तो समझ जाए...*

*असल में वो हिसाब लगाते है कि आपको इज्जत कितनी देनी है!*

Monday, January 28, 2019

Meditation

ध्यान(Meditation) की ताकत:-

जब100 लोग एक साथ साधना करते है तो उत्पन्न लहरें
5 कि.मी.तक फैलती है और नकारात्मकता नष्ट कर
सकारात्मकता का निर्माण करती है।।

यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारो साल पहले दिया था।।

आज पृथ्वी पर केवल4% लोग ही ध्यान करते है लेकिन बचे 96% लोंगो को इसका पॉजिटिव इफेक्ट
होता है।।

अगर हम भी लगातार ध्यान करे तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार
पर दिखाई देगा।।

अगर पृथ्वी पर सभी लोंग ध्यान करनें लगे तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग सभी समस्याओं को
नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।।

😇🌹Sai Blessings 🌹😇
😇🙏🏼Om Sai Ram🙏🏼😇